विजय का प्यार अब भी मेरे दिल में


Antarvasna, hindi sex kahani, kamukta सुबह मॉर्निंग वॉक से लौटने के बाद अपने ऑफिस जाने की तैयारी करने लगे मैं जब घर आई तो बच्चों से कहा कि चलो तुम जल्दी से तैयार हो जाओ लेकिन बच्चे कहां मानने वाले थे। वह कहने लगे मम्मी नहीं आप ही हमें नहला दो और आखिरकार मुझे ही उन्हें नहलाना पड़ा। मैंने उन्हें नहलाया तो वह लोग अब मेरी तरफ देख करके कहने लगे मम्मी हमारे लिए आप मैग्गी बना दीजिये मैंने उनके लिए मैग्गी बनाई और उन लोगों को स्कूल के लिए तैयार कर दिया। तभी घर के बाहर बस का हॉर्न सुना तो मैंने बच्चों से कहा चलो जल्दी से चलो बच्चे कहने लगे ठीक है मम्मी, मैंने उन्हें स्कूल के लिए भेज दिया। वह दोनों ही अपने स्कूल के लिए जा चुके थे जब मेरे दोनों बच्चे बस में बैठे थे तो वह दोनों मुझे हाथ हिलाकर बाय-बाय का इशारा कर रहे थे और मैंने भी उन्हें बाय कहकर अलविदा कर दिया।

अब मैं घर आई तो घर में बिल्कुल शांति थी पतिदेव अब तक अपने बिस्तर से हिले तक नहीं थे मैंने उन्हें उठाया और कहा क्या आपको आज ऑफिस नहीं जाना है। वह कहने लगे आज मेरा ऑफिस जाने का मन नहीं है मैंने उन्हें कहा तो आप मुझे पहले ही बता देते मैंने तो आपके लिए नाश्ता बना दिया है। वह मुझे कहने लगे कोई बात नहीं मैं नाश्ता कर लूंगा मैंने उन्हें कहा मैं तैयार हो रही हूं मुझे ऑफिस के लिए निकलना है और यह कहते ही मैं तैयार होने लगी और अपने ऑफिस जाने की तैयारी करने लगी। मैंने अपने ऑफिस जाने की तैयारी कर ली थी और अपने बैग को उठाते हुए मैं सीढ़ियों से नीचे उतरी तो सामने ही मेरी सहेली खड़ी थी। वह भी मेरे साथ मेरे ही ऑफिस में काम करती है वह मुझे कहने लगी आज हम लोग ट्रेन से ऑफिस जाते हैं मैंने उसे कहा ठीक है। वैसे तो हम लोग बस से ही ऑफिस जाया करते थे लेकिन आज ना जाने मेरी सहेली के मन में क्या आया। हम लोग ट्रेन से ही ऑफिस जाने वाले थे और हम लोग ट्रेन का इंतजार करने लगे मुंबई में लोकल की सर्विस का कोई जवाब नहीं है बस कुछ ही देर बाद ट्रेन भी आ गई। जैसे ही ट्रेन आई तो मैंने अपनी सहेली से कहा चलो फिर हम लोग ट्रेन में चढ़ जाते हैं काफी भीड़भाड़ थी और हम दोनों ट्रेन में चढ़ गए हमें बैठने के लिए जगह तो नहीं मिली थी लेकिन हम लोग खड़े ही थे।

हम दोनों एक दूसरे के आस पास ही खड़े थे और आपस में बात कर रहे थे मेरी सहेली कहने लगी कि ऑफिस में प्रशांत का व्यवहार बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। प्रशांत जी हमारे ऑफिस में हमारे मैनेजर है और वह थोड़ा गुस्सैल किस्म के हैं छोटी-छोटी बात पर वह गुस्सा हो जाते हैं। मैंने अपनी सहेली से कहा दरअसल उनका बीपी जल्दी हाई हो जाता है वह मुझे कहने लगी कल तुम्हें मालूम है उन्होंने मुझे कैसे डांटा था फाइल में छोटी सी गलती हो गई थी और उस पर ही उन्होंने मुझे ना जाने क्या कुछ कह दिया था। मैंने अपनी सहेली से कहा तुम बेवजह ही उनकी बातों को अपने दिल में ले लेती हो तुम उनकी बातों को दिल में ना लिया करो और तुम्हें इतना सोचने की आवश्यकता नहीं है। मेरी सहेली कहने लगी कि तुम बिल्कुल सही कह रही हो मैंने उसे कहा तुम्हें मालूम है प्रशांत जी की पत्नी उन्हें छोड़कर जा चुकी है इसी वजह से तो वह इतने तिल मिलाए हुए रहते हैं। इस बात पर मेरी सहेली हंस उठी और कहने लगी उनके साथ ऐसा ही होना चाहिए था भला उनकी पत्नी भी उनके साथ कितने दिन तक रह पाती। मैंने अपनी सहेली से कहा चलो छोड़ो यह बात अब हमारा स्टेशन आने वाला है और हम दोनों अपने स्टेशन पर उतर कर वहां से अपने ऑफिस पैदल ही चले गए। हमारा ऑफिस वहां से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर था और हम दोनों पैदल ही अपने ऑफिस चले गए थे। हम जैसे ही अपने ऑफिस पहुंचे तो मुझे मेरे पति का फोन आया और वह कहने लगे सुनैना मैं आज अपने मामा जी के घर जा रहा हूं तो मुझे आने में देर हो जाएगी। मैंने अपने पति से कहा लेकिन तब तक बच्चे भी तो आ जाएंगे उन्हें कौन देखेगा वह कहने लगे ठीक है मैं देखता हूं जब वह आ जाए तो उसके बाद ही मैं जाऊंगा। मैंने अपने पति से कहा आप आज रहने दीजिए ना कभी और चले जाइएगा लेकिन वह कहने लगे नहीं मुझे आज ही जाना है क्योंकि मुझे उनसे कोई जरूरी काम है।

मैंने उन्हें कहा ठीक है जब बच्चे आ जाए तो आप उन्हें कुछ खिला दीजिएगा और उसके बाद आप अपने मामा जी के पास चले जाइएगा। वह कहने लगे ठीक है मैं अपने मामा जी के पास तभी जाऊंगा और फिर मैं अपने ऑफिस का काम करने लगी जब शाम को मैं और मेरी सहेली घर लौटे तो मेरे बच्चे सोए हुए थे। मेरे पास घर की दूसरी चाबी रहती है इसलिए मैंने दरवाजे को खोल लिया था और जब मैं अंदर गई तो वह दोनों गहरी नींद में थे। मैंने अपने लिए चाय बनाई और चाय पीने के बाद मैं कुछ देर टीवी देखने लगी मैंने जब टीवी देखी तो मेरी आंखों में नींद आने लगी थी और एक पल के लिए मैं सोफे पर ही लेट गई। जब मैं उठी तो मैंने देखा समय काफी हो चुका था और उसके बाद मैंने बच्चों को उठाया और कहा बेटा उठ जाओ वह दोनों उठ गए थे। मैंने रात का डिनर बनाया और हमेशा की तरह वही दिनचर्या मेरी चलती आ रही थी कुछ दिनों बाद हमारे ऑफिस में एक नई लड़की आई और उसकी शादी शायद कुछ दिनों पहले ही हुई थी। जब उसने जॉइन किया तो उससे मेरी अच्छी बातचीत होने लगी कुछ ही समय के बाद हम लोग अच्छे दोस्त बन चुके थे मैंने उससे कहा कभी तुम अपने पति को मेरे घर पर लाना। वह कहने लगी हां क्यों नहीं लेकिन फिलहाल तो वह यहां रहते नहीं हैं वह अपनी कंपनी की तरफ से जर्मनी गए हुए हैं उनका वहां कुछ काम है।

मैंने माला को कहा ठीक है माला जब तुम्हारे पति आ जाए तो तुम हमारे घर पर कभी डिनर के लिए आना माला कहने लगी जी जरूर आपके घर पर जरूर मैं डिनर के लिए आऊंगी। माला की शादी को कुछ समय ही हुआ था माला का नेचर बड़ा ही अच्छा था और वह मुझे बहुत अच्छी लगती थी मैं हमेशा माला की तारीफ किया करती थी। मेरी सहेली भी माला के बारे में कहती कि वह बहुत अच्छी है काम में भी वह पूरे लगन के साथ काम किया करती थी। एक दिन हम लोग ऑफिस में बैठे थे तभी माला कहने लगी मेरे पति वापस आ चुके हैं मैंने माला से कहा कल तुम उन्हें हमारे घर पर डिनर के लिए ले आना। माला कहने लगी ठीक है कल हम लोग जरूर आपके घर पर आ जाएंगे और अगले दिन जब वह हमारे घर पर डिनर के लिए आने वाले थे तो मैंने सारी तैयारियां कर ली थी। मैंने आप सारी तैयारियां कर ली थी जब माला और उसके पति हमारे घर पर आए तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। उसके पति विजय और मैं साथ में पढ़ा करते थे मुझे अपना वही पुराना प्यार वापस याद आ गया लेकिन विजय और मै एक दूसरे से नजर चुराने की कोशिश कर रहे थे। हम दोनों ही एक दूसरे से अनजान बनने की कोशिश करते परंतु फिर भी हम दोनों की नजरे टकरा ही जाती थी। मैंने विजय से शादी के लिए मना किया था और मुझे नहीं मालूम था कि कभी मेरी मुलाकात विजय से हो भी पाएगी या नहीं लेकिन अचानक से हुई मुलाकात से हम दोनों हैरान रह गए थे। मेरे अंदर से दोबारा वही प्यार जागने लगा था मेरे अंदर अब भी भी विजय के लिए प्यार बचा हुआ था और मैं उसे भूल नहीं पाई थी।

उस दिन तो विजय चले गए थे लेकिन उसके बाद मैंने एक दिन विजय को फोन किया तो वह मुझे कहने लगे सुनैना तुमसे इतने सालों बाद मिलकर ऐसा लग रहा है जैसे कि दोबारा वही कॉलेज का समय वापस लौट आया हो। तुम्हारी शादी को इतने समय हो गए लेकिन हम लोग एक दूसरे से कितनी दूर थे विजय ने कहा मैं आज तक तुम्हारी यादों को अपने दिल से भुला नहीं पाया हूं। विजय का प्यार अब भी मेरे दिल में था और मेरे लिए भी विजय के दिल में अब भी वही इच्छा थी जो पहले थी और इसी के चलते हम दोनों ने एक दिन मिलने का फैसला कर लिया क्योंकि हम दोनों को ही पता था कि हम दोनों एक दूसरे के बिना रह ही नहीं सकते। विजय ने मुझे अपने घर पर बुला लिया जब मैं विजय के साथ बैठी थी तो हम दोनों एक दूसरे से अपनी पुरानी बातें कर रहे थे। उसी दौरान मैंने विजय से कहा कि तुम मेरे होठों को चूम लूं तो विजय भी अपने आपको ना रोक सके और विजय ने जैसे ही मेरे होठों को चूमा तो मुझे भी अच्छा लगने लगा और जिस प्रकार से विजय के लंड को मैंने अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे भी अच्छा लग रहा था।

मैं विजय के लंड को बहुत देर तक अपने मुंह में लेकर चूसती रही मेरे अंदर उत्तेजना जाग चुकी थी और जैसे ही मैंने विजय के लंड को अपनी योनि के अंदर लिया तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि वही पुराना दौर लौट आया हो। विजय के लंड में आज भी वही बात थी और विजय मुझे कहने लगे तुम भी बिल्कुल बदली नहीं हो तुम भी बिल्कुल पहले जैसे ही हो और तुम्हें देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। विजय मेरी आंखों में आंखें डालकर मुझे धक्के मार रहे थे वह जिस प्रकार से मुझे धक्के मारते उससे मेरा बदन पूरी तरीके से हिल उठता और मुझे बढ़ा ही मजा आता। मैं भी विजय के लंड को भला कितना देर तक बर्दाश्त कर सकती थी अब मेरे अंदर से भी गर्मी बाहर की तरफ को निकलने लगी थी। विजय भी पूरी तरीके से उत्तेजित होकर मुझे कहने लगे कि मेरा वीर्य निकलने वाला है और विजय ने अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर ही गिरा दिया। विजय का वीर्य मेरी योनि में गिर चुका था और हम दोनों की पुरानी यादें अब ताजा हो गई। मैंने यह बात माला को तो नहीं बताई कि मैं विजय को जानती हूं।

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