तुम मुझे चोदो ना जानेमन


Hindi sex kahaniyan, antarvasna मेरा नाम प्रताप है मैं जौनपुर जिले का रहने वाला हूं मेरे भैया ने अलीगढ़ में एक फैक्ट्री डाली और उसके बाद उन्होंने मुझे कहा कि तुम भी अलीगढ़ में आ जाओ। मेरे भैया और भाभी अलीगढ़ में ही रहते हैं मैं भी भैया के साथ काम के लिए अलीगढ़ चला गया और वही पर मैं काम करने लगा मुझे काम करते हुए करीब 6 महीने हो चुके थे। मैंने एक दिन भैया से कहा भैया मैं कुछ दिनों के लिए घर हो आता हूं भैया कहने लगे ठीक है तुम गांव चले जाओ। मैं गांव चला गया और जब मैं गांव गया तो मेरे माता-पिता मुझे देख कर खुश हो गए वह कहने लगे बेटा तुमने बहुत अच्छा किया जो गांव चले आए हम लोग तो सोच ही रहे थे कि तुम कब हमसे मिलने के लिए आओगे।

मेरी मां कहने लगी क्या तुम्हारे भैया नहीं आए तो मैंने उन्हें कहा नहीं मां काम काफी ज्यादा है इसलिए मैं ही आपसे मिलने के लिए चला आया। मैंने अपनी मां से कहा आप लोग भी हमारे साथ चलिए ना, वह कहने लगे बेटा गांव में खेती का भी तो काम है यह काम कौन संभालेगा। मैंने उनसे कहा ठीक है जैसा आपको उचित लगे मैं अपने गांव करीब 15 दिनों तक रुका और उसके बाद मैं वापस अलीगढ़ चला गया। मैं जब अलीगढ़ गया तो वहां पर मुझे मालूम पड़ा कि हमारे पड़ोस में एक महिला रहने के लिए आई हैं लेकिन उसका पूरे मोहल्ले में सब लोगों ने जीना हराम कर दिया था। सब लोग उसे बड़ी ही गलत नजरों से देखा करते थे उस महिला का नाम सुलेखा है लेकिन मुझे उसके चेहरे पर देख कर ऐसा लगता जैसे कि वह काफी तनाव में है। वह किसी से कुछ भी नहीं कहती थी वह अपने काम पर जाती और वहां से जब लौटती तो अपने घर के अंदर ही रहती थी मैं उसे बहुत कम ही बाहर देखा करता था। मोहल्ले की सारी महिलाओं ने उसका जीना हराम कर दिया था ना जाने उसके बारे में क्या अनाप-शनाप कहते रहते थे जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं था। एक दिन मैं फैक्ट्री से जल्दी चला आया तो मेरी भाभी और उनके साथ में दो चार महिलाएं और खड़ी थी जो कि घर के बिल्कुल बाहर ही खड़ी थी। मैं पहले तो अंदर फ्रेश होने के लिए चला गया उसके बाद मैं बाहर हॉल में बैठा हुआ था तो बाहर से आवाज अंदर की तरफ को आ रही थी मेरी भाभी और वह महिलाएं सुलेखा के बारे में बात कर रहे थे।

वह कह रहे थे कि सुलेखा की वजह से मोहल्ले का पूरा माहौल खराब हो गया है और ना जाने उन्होंने उसके बारे में क्या क्या कहा। मैं तो यह सब सुनकर बड़ा आश्चर्यचकित रह गया कि मेरी भाभी भी सुलेखा के बारे में ऐसा ही सोचती हैं जैसा कि सब लोग सोचते हैं। जब भाभी के साथ की महिला चली गई तो मैंने भाभी से कहा भाभी आप लोग सुलेखा को ऐसा क्यों समझते हैं कि उसकी वजह से पूरा मोहल्ला ही खराब हो रहा है। मेरी भाभी मुझे कहने लगे प्रताप तुम अभी इन सब चीजों को नहीं समझते मैंने उन्हें कहा भाभी ऐसा नहीं है मैं भी अब अपनी जिम्मेदारियां खुद उठाने लगा हूं मुझे भी अच्छे बुरे की समझ है। भाभी मुझसे कहने लगे तुम कुछ ज्यादा ही सुलेखा की तरफदारी कर रहे हो मैंने भाभी से कहा ऐसा नहीं है मैं उसकी कोई तरफदारी नहीं कर रहा लेकिन मैंने देखा है कि यहां पर सब लोग उसके बारे में बहुत गलत कहते हैं उसने ऐसा क्या कर दिया जो आप लोग उसके बारे में गलत सोचते हैं। भाभी मुझे कहने लगी तुम्हें तो मालूम ही होगा जो तुम उसके शुभचिंतक बने फिर रहे हो मैंने भाभी से कहा मुझे सिर्फ इतना मालूम है कि उसका तलाक हो गया था और वह अब अपने पति के साथ नहीं रहती। भाभी मुझसे कहने लगी तुम्हें सिर्फ उसकी आधी हकीकत मालूम है मुझे तो उसके बारे में जितना मालूम है मैं तुम्हें वह बताती हूं दरअसल वह अपने पति को कभी पसंद ही नहीं करती थी। उसकी शादी के बाद जब उन दोनों के बीच झगड़े शुरू हुए तो उस बीच एक दिन उसने अपने पति के ऊपर हमला भी कर दिया जिससे कि उसके पति घायल भी हो गए। वह सुलेखा की हरकतों से परेशान आ चुके थे जिस वजह से उन्होंने सुलेखा को तलाक दिया और मैंने तो सुना है कि सुलेखा के ना जाने और कितने लोगों के साथ गलत संबंध थे वह एक चरित्रहीन महिला है।

इस बात से मुझे थोड़ा अजीब सा लगा लेकिन फिर भी मैं सुलेखा के लिए कभी गलत नहीं सोचता था मैं तो सिर्फ यह चाहता था कि उसे भी जीने का हक मिले और सब लोग उसके बारे में गलत ना कहे। सुलेखा को भी शायद अब इन बातों की आदत पड़ चुकी थी इसलिए वह ज्यादा किसी के साथ बात नहीं करती थी। एक दिन सुलेखा मुझे रास्ते में मिल गई और वह हमारे बिल्कुल आगे चल रही थी मैंने सोचा आज मैं सुलेखा से बात कर लेता हूं। मैंने सुलेखा से जब बात की तो मुझे उससे बात करके अच्छा लगा और मुझे बिल्कुल भी ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि वह किसी भी प्रकार से गलत है लेकिन फिर भी सब लोग उसके बारे में गलत ही कहते हैं। मुझे सुलेखा ने बताया मैंने जब से अपने पति को डिवोर्स दिया है तब से मेरा जीना हराम हो चुका है मैं जैसे तैसे अपना जीवन काट रही हूं लेकिन मैं अपनी जिंदगी में बिल्कुल भी खुश नहीं हूं। कई बार मैं सोचती हूं कि मैंने ऐसा क्या गलत किया जिसकी सजा मुझे अब तक भुगतनी पड़ रही है। मेरी उस दिन सुलेखा के साथ ज्यादा बातचीत नहीं हो पाई लेकिन उसके बाद एक दिन मेरी उससे मुलाकात हुई उस दिन सुलेखा ने मुझे कहा की मैं बहुत परेशान हूं। मैंने उसे समझाया और कहा तुम्हें इस मुसीबत का सामना खुद करना पड़ेगा वह मुझे कहने लगी लेकिन आप तो मेरे बारे में बहुत अच्छा सोचते हैं। पुरी कॉलोनी में मुझे आप ही ऐसे लगे जो कि मेरे बारे में सही सोचते हैं नहीं तो यहां पर सब लोग मेरे बारे में ना जाने क्या क्या कहते रहते हैं मैं तो बहुत परेशान भी हो चुकी हूं लेकिन अब तो जैसे मुझे आदत सी हो चुकी है।

एक दिन मेरी भाभी मुझे कहने लगी आजकल तुम सुलेखा के साथ कुछ ज्यादा ही घूम रहे हो तुम उससे दूर रहो मैं तुम्हें अभी भी समझा देती हूं वह बिल्कुल भी सही नहीं है तुम उससे जितना दूर रहोगे उतना ही ठीक रहेगा तुम्हें उसके बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है। मैंने उस दिन भाभी से कहा भाभी मैं सुलेखा के बारे में सब कुछ जानता हूं लेकिन यहां पर ना जाने सब लोगों ने उसके प्रति क्या धारणा बना दी है यह तो आपको भी पता ही है। मैंने उससे जितनी बात की मुझे बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह गलत है भाभी मुझे कहने लगी लगता है सुलेखा ने तुम्हारे ऊपर भी जादू कर दिया है मुझे यह बात तुम्हारे भैया को बतानी पड़ेगी। भाभी ने जब यह बात भैया को बताई तो भैया भी मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे तुम्हें मालूम है ना कि वह एक तलाकशुदा महिला है, तुम उसके साथ ना ही रहो तो ठीक रहेगा। मैंने भैया से कहा भैया मैंने कोई गलती नहीं की है मैं सिर्फ उससे बात करता हूं मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा कि वह गलत है। भैया मुझसे कहने लगे तुम से बात करना ही बेकार है और वह अपने कमरे में चले गए। मुझे सुलेखा पर पूरा यकीन था कि वह बिल्कुल भी गलत नहीं है इसलिए मैंने उसका ही साथ दिया और जिस वजह से मुझे मेरे भैया और भाभी से दूरी भी बनानी पड़ी। जब सुलेखा को यह बात मालूम पडी तो वह भी मेरे नजदीक आने लगी उसने मुझसे कहा देखो प्रताप तुम बेवजह ही मेरी वजह से अपने घर में अपने भैया भाभी से दूरियां मत बढ़ाओ मेरा तो क्या है मेरी जिंदगी वैसे भी बर्बाद हो चुकी है और मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है। मैंने उसे समझाया और कहा देखो सुलेखा तुम एक अच्छी महिला हो और मुझे तुम बहुत अच्छी लगती।

हम दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी और हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे तरीके से पहचानने लगे एक दिन सुलेखा और मेरे बीच किस हो गया। हम दोनों ही अपने आप को रोक नहीं पाए जब हम दोनों के बीच में किस हुआ तो हम दोनों उसके बाद एक दूसरे से सेक्स करने के बारे में सोचने लगे। मैं एक दिन सुलेखा से मिलने के लिए उसके घर पर चला गया और उस दिन वह बड़ी ही सेक्सी लग रही थी। मैं और वह बात कर रहे थे मैंने उससे कहा तुम्हारा बदन देखकर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। वह मुझसे कहने लगी तुम्हें मेरे साथ क्या सेक्स करना है मैंने उसे कहा हां तो उसने मेरे होठों को किस किया। वह मुझे अपने बेडरूम मे ले गई मैंने उसके कपड़े उतारे। जब उसने कपड़े उतारे तो वह नग्न अवस्था में थी उसके नंगे बदन को देखकर मैं उत्तेजित होने लगा और उसके स्तनों को में दबाने लगा। मुझे बड़ा मजा आने लगा और वह भी खुश हो गई मैंने जैसे ही उसके बदन को सहलाना शुरु किया तो उसकी उत्तेजना में बढोतरी हो गई।

मैंने जब अपने लंड को बाहर निकालकर उसकी योनि पर रगडना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी प्रताप अब मुझसे नहीं रहा जा रहा तुम अपने लंड को मेरी योनि में डाल दो। मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसके मुंह से तेज चीख निकली। वह कहने लगी कितने अर्से बाद मुझे ऐसा महसूस हुआ है जैसे कोई तो मेरे पास अपना है उसने अपने बदन को मुझ पर न्योछावर कर दिया। वह अपने पैरों को चौड़ा करने लगी जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो उसके अंदर से गर्मी बाहर निकल आती और वह जोश मे आ जाती। उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्म पानी बाहर निकलने लगा मैंने उसे कहा सुलेखा तुम घोड़ी बन जाओ वह घोड़ी बन गई। मैंने उसे और भी तेजी से चोदना शुरू कर दिया जिससे कि मैं ज्यादा समय तक उसकी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरा वीर्य पतन सुलेखा की योनि में हो गया। हम दोनों के बीच सेक्स संबंध बन चुके थे मै ज्यादातर समय सुलेखा के साथ ही बिताया करता।

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