मुझे रूम पर ले चलो ना बाबू


Kamukta, antarvasna मैं चंडीगढ़ में जिस कॉलेज में पढ़ता था उस कॉलेज से मेरा प्लेसमेंट दिल्ली में हुआ मैं दिल्ली आ चुका था लेकिन मुझे दिल्ली आने के बाद कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। जब मैं शुरुआत में दिल्ली आ गया तो सबसे पहले मेरी जेब किसी ने काट ली उस वक्त मेरे पास ज्यादा पैसे भी नहीं थे लेकिन उसके बाद मैं इन चीजों के प्रति सतर्क होने लगा। मैं चंडीगढ़ से दिल्ली तो आ चुका था लेकिन मुझे अब अकेले रहना था मैं पहले अपने एक साथी के साथ रहा करता था वह मेरे ऑफिस में ही काम करता है लेकिन बाद में मैंने सोचा कि मैं अकेले ही रहूंगा। उसके साथ मुझे कई बार कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था वह हमेशा ही मुझ पर काम के लिए दबाव बनाता रहता और कहता कि तुम कुछ भी काम नहीं करते हो।

उसका नेचर मुझे कुछ ठीक नहीं लगता था शुरुआत में तो सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन बाद में मुझे लगा कि वह बदलने लगा है और उसके व्यवहार में काफी परिवर्तन आ चुका था इसलिए मैंने सोचा कि अब मैं उससे अलग ही रहूंगा। मैंने उससे अलग रहने का फैसला कर लिया था और मैंने एक कमरा और किचन किराए पर ले लिया मैंने जब वह कमरा किराए पर लिया तो उसके बाद मैंने उसे बड़े ही अच्छे तरीके से व्यवस्थित बनाकर रखा मैं अपनी चीजों को बहुत ही संभाल कर रखा करता था। दिल्ली में मेरा कोई अच्छा दोस्त बन ही नहीं पाया था क्योंकि मैं अपने ऑफिस के कामों में इतना बिजी रहता था कि मेरे पास इन सब चीजों के लिए समय ही नहीं रहता था। मुझे अब दिल्ली में समय होने लगा था तो मैं चाहता था कि कोई मेरा दोस्त बने लेकिन शायद मेरी किसी के साथ भी दोस्ती नहीं हो पाई। एक दिन मैं मेट्रो से अपने ऑफिस जा रहा था मैं बड़ी जल्दी में अपने ऑफिस जा रहा था तभी मेरी टक्कर एक लड़की से हुई उससे मेरी टक्कर इतनी जोरदार थी कि वह जमीन पर गिरते गिरते बची। उसके बाद तो उसने मुझे काफी भला-बुरा कहा मैंने उसे कई बार सॉरी कहा लेकिन उसके बाद भी वह मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं थी उसे लगा कि मैंने यह सब जानबूझकर किया है लेकिन मैंने ऐसा बिल्कुल भी नहीं सोचा था।

वह मुझ पर बहुत ज्यादा गुस्सा थी मेरा उस दिन मूड बिल्कुल भी अच्छा नहीं था मैं जब ऑफिस पहुंचा तो ऑफिस में भी मेरा मन काम पर लग ही नहीं रहा था क्योंकि उस लड़की की बातें अब तक मेरे दिमाग में घूम रही थी। मैं मन ही मन सोचने लगा कि क्या दोबारा मैं उस लड़की से कभी मिलूंगा लेकिन ऐसा कुछ समय बाद ही हो गया मेरी उससे मुलाकात मेरे ऑफिस में ही हुई। वह मेरे ऑफिस कुछ काम के सिलसिले में आई हुई थी मुझे नहीं मालूम था कि मेरे ऑफिस में ही उसके कोई जानकार काम करते हैं। मैं बहुत ज्यादा खुश था मैंने जब उसे देखा तो मेरे अंदर बहुत खुशी थी उसने भी मुझे देख लिया था वह मेरे पास आई और कहने लगी तुम तो वही हो जो उस दिन मुझसे मेट्रो स्टेशन पर टकराए थे। मैंने उसे कहा लेकिन मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था तो वह कहने लगी खैर छोड़ो मेरा नाम ममता है मैंने उसे कहा मेरा नाम निखिल है। उस दिन उसने मुझसे बड़े अच्छे तरीके से बात की मुझे भी लगा कि वह लड़की अच्छी है मैंने उसे कहा यदि तुम्हें कोई तकलीफ ना हो तो क्या तुम मुझे अपना नंबर दे सकती हो। वह मुझे कहने लगी मैं ऐसे ही किसी अंजान को अपना नंबर कैसे दे दूं मैंने उसे कहा कोई बात नहीं तो फिर रहने दो। मैंने उसके बाद उससे उसके नंबर के लिए नहीं कहा लेकिन मैंने मन ही मन तो सोच लिया था कि मैं ममता का नंबर लेकर ही रहूंगा और कुछ दिनों बाद मैंने उसे फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। शायद उसने भी मेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर लिया और जब उसने मेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लिया तो उसके बाद वह मुझसे बात करने लगी थी हम दोनों की बातें मैसेज पर ही हुआ करती थी उससे ज्यादा हम दोनों का संपर्क नहीं हो पाता था। मैं मैसेज पर ही ममता से बात कर के खुश था मैंने उससे उसके नंबर के लिए कभी नहीं कहा लेकिन जब वह मुझसे बात करने लगी तो उसे भी लगा कि दिल्ली में शायद मैं काफी अकेला हूं इस वजह से उसने मुझे अपना नंबर दे दिया।

जब उसने मुझे अपना नंबर दिया तो मैं खुश हो गया मैं और ममता एक दूसरे से काफी बातें किया करते हैं और हम दोनों बहुत खुश थे। मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि ममता से मेरी इतनी अच्छी दोस्ती हो जाएगी लेकिन यह भी एक इत्तेफाक ही था कि ममता से मेरी इतने बड़े शहर में दोस्ती हो चुकी थी। जब भी मेरे पास समय होता तो हम दोनों ही साथ में घूमने के लिए चले जाया करते थे ममता का साथ पाकर मैं बहुत खुश था। एक दिन मैंने ममता से अपने दिल की बात कह दी लेकिन ममता को यह सब बहुत बुरा लगा वह कहने लगी मैं तुम्हें सिर्फ अपना दोस्त मानती हूं इससे ज्यादा मैंने तुम्हारे बारे में कभी नहीं सोचा। मुझे तो लगता था कि शायद ममता के दिल में भी मेरे लिए कुछ चल रहा होगा लेकिन ममता ने मुझे स्पष्ट कर दिया कि मेरे दिल में तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं चल रहा है मैं सिर्फ तुम्हें अपना अच्छा दोस्त मानती हूं। मुझे यह सब रिलेशन का चक्कर बिल्कुल पसंद नहीं है मेरे माता-पिता मुझे जहां कहेंगे मैं वही शादी करूंगी और उनके बिना मैं कुछ भी नहीं कर सकती। मैं ममता के चेहरे की तरफ देखता रहा मुझे यह तो महसूस हो चुका था कि ममता एक बहुत ही अच्छी लड़की है लेकिन मैं तो उसे दिल ही दिल चाहने लगा था और शायद मेरी ही गलती थी जो मैं ममता को कुछ ज्यादा ही प्यार करने लगा था। ममता तो मुझे सिर्फ अपना दोस्त मानती थी और इससे ज्यादा हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं था। एक दिन ममता मुझे कहने लगी आज मुझे मेरे फ्रेंड की शादी में जाना था तो क्या तुम मेरे साथ चलोगे मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं।

ममता और मैं उसकी फ्रेंड की शादी में चले गए उसने मुझे अपनी फ्रेंड से मिलवाया मैं उसकी फ्रेंड से मिलकर खुश था मुझे उससे मिलकर बहुत अच्छा भी लगा लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि उसकी फ्रेंड मेरे और ममता के बारे में क्या सोचती है। वह कहने लगी कि अच्छा तो यह तुम्हारा बॉयफ्रेंड है मैं ममता के चेहरे पर देखने लगा ममता ने उसे कहा नहीं यह मेरा बॉयफ्रेंड नहीं है हम लोग अच्छे दोस्त हैं और इससे ज्यादा हमारे बीच में कुछ भी नहीं है। उसके फ्रेंड को तो जैसे यकीन ही नहीं हुआ वह सिर्फ यही कहे जा रही थी कि तुम दोनों का रिलेशन है लेकिन उसकी शादी को हम लोगों ने काफी इंजॉय किया। मैंने ममता से पूछा क्या पारुल तुम्हारी बचपन की फ्रेंड है तो वह कहने लगी नहीं हम लोग कॉलेज में साथ पढ़ा करते थे तो हमारी कॉलेज में अच्छी दोस्ती हो चुकी थी पारुल बहुत ही अच्छी लड़की है और वह बहुत समझदार भी है। मैंने ममता से कहा लेकिन वह तो हम दोनों के बारे में कुछ और ही सोच रही थी उसे लगा कि मैं तुम्हारा बॉयफ्रेंड हूं वह कहने लगी अरे ऐसा कुछ नहीं है। हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे हम दोनों ने उस दिन साथ में काफी अच्छा समय बिताया मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम मैं ममता के साथ अच्छा समय तो बिता पा रहा हूं। रात कफी हो चुकी थी ममता को घर जाने के लिए लेट हो चुकी थी मैंने उससे कहा तुम मेरे यहीं रुक जाओ पहले तो वह मना करती रही लेकिन फिर मान गई और हम दोनों मेरे रूम में चले गए। ममता मेरे साथ ही रुक गई हम दोनों रूम में थे मैंने ममता से कहा तुम कपड़े चेंज कर लो वह कहने लगी नहीं मैं ऐसे ही लेट जाऊंगी।

मैंने उसको अपनी शर्ट दे दी मेरे शर्ट उस पर काफी लंबी हो रही थी उसने नीचे से कुछ भी नहीं पहना था वह बिस्तर पर आकर लेट गई परंतु जब मैंने उसकी गोरी जांघ को देखा तो मेरे अंदर उत्तेजना जाग जाती। आखिरकार मै जवानी का जोश कब तक रोक पाता मैंने जैसे ही अपने लंड को बाहर निकाला तो ममता कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो। मैं उसके सामने अपने लंड को हिलाने लगा वह मुझे देखने लगी शायद वह भी अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी जैसे ही ममता ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया तो उसे मजा आने लगा। वह मेरे लंड को बडे अच्छे से हिलाने लगी उसने अपने मुंह के अंदर तक मेरे लंड को समा लिया और उसे चूसने लगी। वह मेरे लंड को बड़े ही अच्छे से चूस रही थी मेरे अंदर भी जोश बढता जा रहा था काफी देर तक उसने मेरे लंड का रसपान किया जैसे ही मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसने अपने दोनों पैरों को खोल लिया।

मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देने लगा ममता को मजा आने लगा था वह मुझे कहने लगी तुम और भी तेजी से धक्के मारो। मैं काफी तेज गति से धक्के मारता वह मुझे कहने लगी मुझे नहीं मालूम था कि तुम्हारा इतना मोटा लंड होगा लेकिन मुझे काफी मजा आया। मैंने ममता के साथ काफी देर तक उसकी चूत के मजे लिए मुझे बहुत मजा आया और उस रात मुझे बहुत गहरी नींद आई अगली सुबह मैंने ममता को उसके घर पर छोड दिया और मैं वहां से अपने ऑफिस चला गया। ममता मुझसे हमेशा कहती है कि क्या मैं तुम्हारे रूम पर आ जाऊ मैं उसे मना करता हूं लेकिन उसके बावजूद भी वह आ ही जाती है। जब भी वह रूम पर आती है तो मुझे कहती है क्या तुम्हें वह पहला दिन याद है जब मैं तुम्हारे साथ रुकी थी। वह मुझे हमेशा ही याद दिलाती है कि कैसे मैंने उसकी चूत मारी थी वह बहुत खुश रहती है और मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए हमेशा आ जाती हैं हम दोनों के बीच में ना जाने ऐसा क्या रिश्ता है होना तो मुझे अपना बॉयफ्रेंड मानती है लेकिन सेक्स भी मेरे साथ ही करती है।

कृपया कहानी शेयर करें :