चूत नही मै गांड मारूगा


Antarvasna, hindi sex kahani, kamukta सुबह बच्चों का नाश्ता बनाकर उन्हें स्कूल तो भेज दिया था लेकिन जब मैं स्कूल से लौटी तो मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी मेरे बदन में दर्द और सर में तो काफी तेज दर्द हो रहा था मुझे लगा मुझे आराम कर लेना चाहिए। कुछ देर मैं आराम करने के लिए लेटी लेकिन सिर में दर्द की वजह से मुझे नींद ही नहीं आ रही थी सोचा दवाई ले लूँ। मैं अपनी अलमारी को खोल कर दवाई के डब्बे को टटोलने लगी उसमें से सर दर्द की दवाई आखिरकार मिल ही गई। मैंने जब दवाई ली तो कुछ देर बाद थोड़ा राहत मिली और मेरी आंख लग गई मेरी आंख लग चुकी थी और मुझे अब नींद आ गई थी करीब दो घंटे बाद मेरी आंख खुली तो मैंने देखा घर का सामान पूरा बिखरा पड़ा था। बच्चों के साथ कहां आराम करने का मौका मिलता है मैं घर का सामान समेटने लगी बच्चों ने अपने कमरे का तो इतना बुरा हाल किया हुआ था कि सफाई करते-करते करीब एक घंटा लग गया था।

मैंने जब घर की सफाई की तो मुझे दोबारा से थकावट महसूस होने लगी और मैं बिस्तर पर लेट गई मुझे लगा मुझे किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए लेकिन मैं बच्चों के आने का इंतजार कर रही थी और जब बच्चे स्कूल से लौट आए तो मैंने बच्चों से कहा बेटा मैं डॉक्टर के पास जा रही हूं तुम लोग घर में शैतानी मत करना। वह कहने लगे हां मम्मी हम लोग कोई शरारत नहीं करेंगे और फिर मैं डॉक्टर के पास चली गई। हमारे घर के कुछ ही कदम पर एक डॉक्टर साहब हैं वह पिछले 20 सालों से काम कर रहे हैं और जब उन्होंने मुझे देखा तो वह कहने लगे अरे मेघा जी क्या हुआ। मैंने उन्हें सारी बात बताई और कहा मेरे बदन और सर में काफी दर्द है मैंने दवाई तो ले ली थी उससे थोड़ा आराम मिल गया था लेकिन दोबारा से वैसा ही महसूस हो रहा है। वह कहने लगे कोई बात नहीं मैं अभी देख लेता हूं उन्होंने जब थर्मामीटर से मेरा बुखार चेक किया तो पता चला बुखार 102 डिग्री है। डॉक्टर साहब कहने लगे मेघा जी आपको तो बहुत बुखार है आप एक काम कीजिए मैं आपको दवा लिख कर दे देता हूं आप दवा लेकर आराम कर लीजिएगा। डॉक्टर साहब ने मुझे दवा लिखकर दे दी और एक दवाई की पुड़िया बना कर उन्होंने मुझे दी और कहा अभी घर जाकर के आप दवाई ले लीजिएगा मैंने उन्हें कहा ठीक है डॉक्टर साहब।

मैंने उन्हें उनकी फीस दी और घर लौट आई मैं जब घर आई तो मैंने देखा बच्चे बहुत ही शरारत कर रहे थे और उन्होंने सामान पूरा इधर से उधर बिखेर रखा था। मैंने उन्हें ऊंचे स्वर में कहा तो वह दोनों अपने कमरे में चले गए और उसके बाद उनके मुंह से कोई आवाज भी सुनाई नहीं दे रही थी। मैंने दवाई ली और मैं सोने की कोशिश करने लगी लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तभी मेरे दोनों बच्चे मेरे पास आये और कहने लगे मम्मी आपको क्या हुआ। मैंने उन्हें कहा बेटा तुम दोनों अपने रूम में आराम से लेट जाओ मेरी तबीयत ठीक नहीं है वह कहने लगे नहीं हमें आपके पास ही सोना है। मैंने उन दोनों को अपने पास ही सुला लिया मैं उनके चेहरे की तरफ देखती तो मुझे थोड़ा अजीब सा जरूर लगता क्योंकि मेरे पति के जाने के बाद उन्हें शायद मैं वह प्यार नहीं देख पाई थी। मैंने पूरी कोशिश की थी कि मैं उन्हें वही प्यार दूं लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया क्योंकि घर के कामों में मैं इतना उल्झी रहती थी कि अपनी तबीयत तक का ख्याल नहीं रख पाती थी इसी वजह से बच्चे शायद शैतान होते जा रहे थे। मेरे पति की यादें आज तक मेरे दिल में ताजा है और मैं जब भी उनके बारे में सोचती हूं तो कुछ पुरानी तस्वीरें मेरे सामने आ जाती हैं। मेरे दोनों बच्चे सो चुके थे और उसके बाद मुझे भी ना जाने कब नींद आई मैं जब उठी तो मैंने देखा टाइम काफी हो गया है मुझे खाना बना लेना चाहिए। हालांकि मेरी तबीयत ठीक नहीं थी परंतु उसके बावजूद भी मुझे बच्चों को तो रात को कुछ खिलाना ही था मैं खाना बनाने के लिए रसोई में चली गई और खाना बनाने लगी। खाना बनाते बनाते पता ही नहीं चला कि कब एक घंटा हो गया और मैं खाना तैयार कर चुकी थी मैंने बच्चों का आवाज लगाते हुए कहा बच्चो आ जाओ खाना तैयार हो चुका है। कुछ ही देर बाद दोनों बच्चे आ गए और वह दोनों कहने लगे मम्मी आपने क्या बनाया है मैंने उन्हें कहा कि बेटा खुद ही देख लो कि मैंने क्या बनाया है।

वह दोनों खाने के लिए आ गए उन्होंने देखा कि मैंने उन दोनों के लिए मैग्गी बनाई है तो वह खुश हो गए और बड़े ही चाव से वह दोनों मैग्गी खाने लगे। मैं उन दोनों को देख रही थी और जब मैंने अपने बच्चों से कहा चलो बेटा अब सो जाओ कल सुबह जल्दी स्कूल जाना है तो वह दोनों सो गए और सुबह जल्दी उठकर मैंने उन्हें तैयार किया और उनको स्कूल भेज दिया। मेरी दिनचर्या बस बच्चों में ही निकल जाया करती थी मुझे अपने लिए तो जैसे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे ऐसा क्या करना चाहिए। मेरी पापा मम्मी एक दिन मेरे पास आये और कहने लगे तुम बच्चों की देखभाल तो अच्छे से कर रहे हो मैंने उन्हें कहा हां। मम्मी वही पुरानी बात वापस दोहराने लगी और कहने लगी कि कैसे राहुल की मृत्यु के बाद तुम पूरी तरीके से टूट चुकी थी लेकिन तुमने हिम्मत नहीं हारी और अपने आगे के जीवन को बड़े अच्छे से तुम जी रही हो। हालांकि मैं अंदर से बहुत ज्यादा दुखी थी लेकिन फिर मुझे मेरे बच्चों के लिए ही सही लेकिन उनके लिए तो मुझे जीना ही था मैं और मेरे मम्मी पापा आपस में बात कर रहे थे। वह लोग मेरी बहुत चिंता करते हैं लेकिन उसके बावजूद भी मैं हमेशा ही अपने मम्मी पापा को कहती की आप लोग मेरी चिंता ना किया कीजिए मैं ठीक हूं। उसके बावजूद भी वह मेरी हर रोज चिंता करते हैं और कहते हैं कि बेटा हम लोगों को हमेशा तुम्हारे बारे में सोच कर बड़ा ही बुरा सा महसूस होता है।

मैं उन्हें कहती कि कोई बात नहीं पापा जो होना था वह हो चुका है लेकिन मुझे बच्चों की देखभाल करनी है और अपने आगे के जीवन को संभालना है। राहुल मेरे लिए कुछ पैसे छोड़कर गए जिससे मेरे घर का भरण पोषण चल रहा था लेकिन मुझे इस बात की हमेशा चिंता रहती थी कि मुझे कुछ तो करना ही पड़ेगा इसके लिए मैंने भी आगे कदम उठाने शुरू किये। मैंने अपना एक छोटा सा लघु उद्योग शुरू करने के बारे में सोच लिया उसके लिए मैं एक सरकारी दफ्तर में गई तो वहां पर मुझे उन्होंने सारी जानकारी दी और मैंने अब अपना छोटा सा उद्योग शुरू करने के बारे में सोच लिया था। मैंने पापड़ का कारोबार शुरू करने के बारे में सोचा उसके लिए मुझे पूरी जानकारी देदी गयी थी। मैं अपने जीवन में आगे बढ़ने लगी थी और सब कुछ पीछे छूटता चला गया। मैं अपने बच्चों की परवरिश भी बड़े अच्छे से कर रही थी मेरे बच्चे भी बहुत खुश रहते थे मैं सब कुछ भूल कर आगे बढ़ चुकी थी और उसी दौरान मेरी मुलाकात ऐसे शख्स से हुई जिसने की मेरे जीवन को पूरी तरीके से बदल कर रख दिया। जब मेरी मुलाकात कुलदीप के साथ हुई तो उसने मेरे जीवन को पूरा बदल दिया कुलदीप मेरे जीवन में आया तो मैं उसे चाहने लगी। हम दोनों के बीच अब सिर्फ शारीरिक संबंध बनना ही बाकी रह गया था हम दोनों ने जब एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए तो मैं कुलदीप की हो चुकी थी। कुलदीप भी जब मेरे पास आया तो वह उस दिन बहुत परेशान नजर आ रहा था मैंने कुलदीप को बैठने के लिए कहा तुम आज क्यों इतना परेशान हो?

कुलदीप मुझे कहने लगा आज जब मैं आ रहा था तो रास्ते में मेरी टक्कर एक बाइक वाले से हो गई और उससे मेरा बहुत झगड़ा हुआ इसलिए मेरा मूड बहुत ज्यादा खराब है। मैंने कुलदीप से कहा कोई बात नहीं जब मैंने कुलदीप से शांत होने के लिए कहा तो वह मुझे कहने लगा लेकिन उसकी गलती थी और उसकी वजह से मेरा मूड पूरा खराब है। मैंने कुलदीप को अपनी बाहों में ले लिया जब मेरे स्तनों कुलदीप से टकराने लगे तो वह खुश हो गया और उसने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया। जब वह मेरे स्तनों को दबा रहा था तो मुझे भी बहुत मजा आता मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी और मेरे अकेलेपन को भी उस दिन कुलदीप ने दूर कर दिया। जब कुलदीप ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं थोड़ा शर्मा रही थी लेकिन जब उसने मेरी ब्रा को उतारकर मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर रसपान करना शुरू किया तो मैं पूरी तरीके से मचलने लगी और मेरे अंदर जवानी उमडने लगी थी। जैसे ही कुलदीप ने मेरी चूत का रसपान किया तो मै अब बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और जब कुलदीप के मोटे लंड को मैने अपने मुंह में लिया तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।

मैंने काफी देर तक उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना जारी रखा मेरे अंदर बहुत ज्यादा जोश पैदा हो गया था। हम दोनों ही अपने कंट्रोल से बाहर हो चुके थे कुलदीप ने मुझे कहा मैं तुम्हारी योनि में अपने लंड को डाल रहा हूं और यह कहते ही उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। जैसे ही कुलदीप का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर घुसा तो मेरे मुंह से चीख निकली और मैं कुलदीप की हो गई। कुलदीप मुझे बड़ी तेज गति से चोद रहा था और उसने मुझे काफी देर तक धक्के दिए लेकिन कुलदीप का मन भर नही रहा था उसने मेरी गांड के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जिस प्रकार से वह मुझे धक्के मारता उससे मैं बिल्कुल भी रह ना सकी। मैं कुलदीप से कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है लेकिन कुलदीप को तो जैसे मेरी गांड मारने में मजा आ रहा था वह मुझे तेज गति से धक्के मारता जिस गति से वह मुझे धक्के मार रहा था उससे मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं कहीं बेहोश ना हो जाऊं। उस दिन मुझे काफी मजा आया जब कुलदीप ने आपने माल को गिराया तो मैने कुलदीप को अपने गले लगा लिया।

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