बहुत हुई रुसवाई अब होगी चुदाई


Antarvasna, hindi sex kahani मैं अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था और घड़ी में 8:30 हो चुके थे मैं बस निकलने ही वाला था तभी भैया ने आवाज लगाते हुए मुझे कहा रोहित ऑफिस के लिए निकल रहे हो क्या। तुम्हारे भैया से कहा हां भैया मैं ऑफिस के लिए ही जा रहा था भैया कहने लगे रोहित जब तुम अपने ऑफिस से निकलोगे तो मुझे फोन करना। मैंने भैया से कहा ठीक है भैया जब मैं अपने ऑफिस से निकलूंगा तो आपको फोन कर दूंगा वैसे क्या कोई जरूरी काम था। रोहित भैया मुझे कहने लगे हां जरूरी काम तो था ही मैं सोच रहा था कि आज आते वक्त हम लोग मौसी से मिलते हुए आ आएं मैंने भैया से कहा ठीक है भैया हम लोग मौसी से मिलते हुए आ जाएंगे। मेरे भैया बड़े ही जिम्मेदार हैं और उन्होंने ही पापा की मृत्यु के बाद घर की बागडोर को संभाल ली उनकी शादी को हुए 8 वर्ष हो चुके हैं और उनकी 5 वर्षीय एक छोटी बालिका है जिसका नाम संध्या है।

भाभी भी बहुत अच्छी हैं और हमारा परिवार बहुत ही खुश रहता है मां भी हमारे साथ ही रहती है और मां की देखभाल भाभी बहुत ही अच्छे से करती हैं। सब कुछ बड़े ही अच्छे और सरल तरीके से चल रहा है मैं जब ऑफिस से शाम को फ्री हुआ तो मैंने भैया को फोन कर दिया और भैया से कहा कि मैं ऑफिस से फ्री हो चुका हूं। वह मुझे कहने लगे बस 5 मिनट बाद मैं भी ऑफिस से फ्री हो जाऊंगा और तुम मौसी के घर के बाहर ही मुझे मिलना मैंने भैया से कहा ठीक है मैं आपको मौसी के घर के बाहर ही मिलता हूं। जब मैं अपने ऑफिस से निकला तो मेरे एक दोस्त ने मुझे कहा कि मुझे तुम क्या आधे रास्ते तक छोड़ दोगे मैंने उसे कहा ठीक है। मैंने उसे आधे रास्ते तक छोड़ दिया और उसके बाद मैं मौसी के पास चला गया जब मैं मौसी के पास गया तो भैया भी कुछ देर बाद पहुंच चुके थे। मौसी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब थी हम लोगों ने मौसी से कहा मौसी आप कोई काम वाली को घर पर क्यों नहीं रख लेते मौसी कहने लगी नहीं बेटा मैं खुद ही कर सकती हूं।

भैया ने मौसी से कहा मौसी आपकी भी उम्र हो चली है आपको किसी को तो काम पर रखना पड़ेगा लेकिन मौसी चाहती थी कि वह खुद ही घर का काम करें। उनका इकलौता लड़का राजीव जो कि विलायत में रहता है और वह घर कम ही आता है हम लोग चाहते थे कि मौसी भी हमारे साथ ही रहने आ जाए। मौसी का हमारे सिवा इस दुनिया में आखिर है कौन जब भी उन्हें कोई मुसीबत आती तो वह सबसे पहले हमें याद किया करते। भैया ने मौसी से कहा आप हमारे साथ चले मौसी मना करने लगी लेकिन भैया की जिद के आगे उनकी एक न चली और हम लोगों उन्हें अपने साथ ले आए मां भी इस बात से बहुत खुश थी की हम लोग मौसी को अपने साथ ले आए हैं। मौसी अपने दुख को किसी के सामने बयां नहीं कर पा रही थी मौसी अपने दुख को सबसे छुपाया करती थी लेकिन तभी एकाएक मौसी टूट पड़ी और उनके मुंह से वह सारी बात निकल पड़ी जो वह कभी कहना भी नहीं चाहती थी। मौसी मां से कहने लगी कि दीदी आपसे क्या कहूं राजीव को मैंने 9 महीने अपनी कोख में रखा और उसे इतने वर्ष मैंने पाला पोषा और उसे कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी लेकिन उसने मेरे लिया आखिर क्या किया। वह जब से विलायत गया है तब से वह मुझसे मिलने सिर्फ एक दो बार ही आ पाया है और उसने किसी विलायती लड़की से भी शादी कर ली है भला वह हमारी संस्कृति और रीति रिवाज क्या जाने। मैं तो बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी हूँ और मुझे अब राजीव से कोई भी उम्मीद नहीं है कि वह वापिस भी आने वाला है मुझे तो ऐसा लगता है कि यदि कोई मेरा इस दुनिया में होता ही नहीं तो कितना अच्छा रहता कम से कम मेरी उम्मीदें तो खत्म हो चुकी होती। मां ने मौसी को सहानुभूति देते हुए कहा क्या हम लोग नहीं हैं हम लोग भी तो तुम्हारे अपने ही हैं और मेरे दोनों बच्चे तुमसे कितना प्यार करते हैं।

मौसी कहने लगी दीदी बस तुम्हारे ही परिवार का तो सहारा है नहीं तो मैं कब की मर चुकी होती। मौसी बहुत ही दुखी थी और उनके दुख की वजह उनका इकलौता लड़का राजीव था राजीव की वजह से ही यह सब हुआ था लेकिन राजीव को तो इन सब चीजों से कोई मतलब ही नहीं था वह अपनी दुनिया में ही खोया हुआ था और जब से वह विलायत गया है तब से वह सब कुछ भूल चुका है। उसके लिए मौसी की कोई अहमियत नहीं है लेकिन हम लोग चाहते थे कि मौसी अब हमारे पास ही रहे मौसी हमारे पास ही रहने लगे थे और उनकी देखभाल भाभी बड़े ही अच्छे से किया करती। मां के साथ वह खुशी रहती थी मेरे लिए भी कई लड़कियों के रिश्ते आने लगे थे लेकिन मैं शादी करना नहीं चाहता था मैं चाहता था कि मैं कुछ समय और रुक कर शादी करूं लेकिन मां चाहती थी की मैं शादी कर लूं। मैंने मां से कहा मां मुझे कुछ समय का और चाहिए मां कहने लगी बेटा तुम्हारे लिए अब रिश्ते आने लगे हैं और तुम्हें एक न एक दिन तो शादी करनी ही है तुम्हारे लिए अच्छे रिश्ते आ रहे हैं तुम एक बार लड़की को देख लो। मैं तो इन सब से बचने की कोशिश करता उसी दौरान हमारे ऑफिस का टूर जयपुर चला गया जब हम लोग जयपुर गए तो जयपुर में जिस होटल में हम लोग रुके हुए थे उसी होटल के मैनेजर नीलम जो कि मुझे बहुत ही भा गई। मैं नीलम से बात करने लगा लेकिन यह सब इतना आसान नहीं होने वाला था मैं जयपुर से वापस लौट चुका था नीलम से अभी भी मेरी बातें फेसबुक के माध्यम से होती रहती थी और हम दोनों एक दूसरे से फेसबुक पर घंटों चैट किया करते थे लेकिन अब मैं चाहता था कि मैं नीलम से अपने दिल की बात कहूं।

मैंने नीलम से एक दिन कह दिया कि नीलम मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं नीलम कहने लगी रोहित मैंने कभी भी तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचा मैंने नीलम से कहा मुझे मालूम है नीलम लेकिन मैं भी तो तुमसे प्यार करता हूं तुम ही बताओ उसका मैं क्या करूं। नीलम कहने लगी मुझे तुम सोचने का मौका दो नीलम को मैंने सोचने का मौका दिया और आखिरकार उसने मेरे रिश्ते को स्वीकार कर लिया और हम दोनों अब एक दूसरे से फोन पर बात किया करते है। मुझे नीलम से बात करना अच्छा लगता मैंने अपने घर में भी नीलम के बारे में सब कुछ बता दिया था लेकिन नीलम के माता-पिता मुझसे नीलम की शादी करवाने के लिए राजी नहीं थे और मैं इस बात से बहुत परेशान था कि कैसे नीलम से मेरी शादी हो। हम लोग इस बात से बहुत परेशान रहते थे लेकिन नीलम मुझे हमेशा कहती कि तुम चिंता मत करो कोई ना कोई रास्ता जरूर निकाल आएगा और हम लोगों उसी दिन के इंतजार में थे कि कब कोई चमत्कार होगा और हम दोनों की शादी हो जाए। नीलम और मेरे बीच कुछ मील की दूरी थी और हम लोग एक दूसरे से मिलना चाहते थे लेकिन नीलम को अपने काम से छुट्टी नहीं मिल पा रही थी और मैं भी ऑफिस में ही बिजी हो गया था। काफी दिनों बाद हम दोनों की जब इस बारे में बात हुई तो मैंने नीलम से कहा मैं तुमसे मिलने के लिए आ रहा हूं तो नीलम कहने लगी ठीक है तुम आ जाओ। मैं उसी होटल में रुका जिस होटल में नीलम काम करती थी जब नीलम और मैं मिले तो हम दोनों एक दूसरे से गले मिलने लगे ऐसा लगा कि मानो कितने वर्षों के बिछड़े हुए एक दूसरे से गले मिल रहे हो नीलम को बहुत ही अच्छा लगा मुझे नीलम से गले मिलकर बहुत खुशी हुई और मैंने नीलम के होठों को चूम लिया।

नीलम के होठों को चूसते ही वह मेरी बाहों में आ गई जिस प्रकार से हम दोनों के बदन से गर्मी निकल रही थी उससे हम दोनों के दिलों की धड़कन तेज होने लगी और मैंने नीलम को बिस्तर पर लेटा दिया। नीलम बिस्तर पर लेट गई तो वह मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी उसकी आंखों मुझे ही देख रही थी। मैंने नीलम के होंठो को चूसना शुरू किया जब मैं उसक पतले और गुलाब जैसे पंखुड़ियों वाले होठों को अपने होठों में लेकर चूसता तो मुझे बड़ा अच्छा लगता और मै काफी देर तक नीलम के साथ चुंबन करता रहा। मैंने नीलम की शर्ट को खोल दिया उसकी शर्ट को खोलते ही उसने सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी उसे मैंने उतार दिया और उसके स्तनों को जैसे ही मैंने अपनी जीभ से स्पर्श किया तो वह मचलने लगी और उसकी बेचैनी मैं समझ सकता था। उसकी योनि से पानी बाहर निकलने लगा था मुझे भी अच्छा लगा था मैंने नीलम की चूत पर अपने होंठो से चाटना शुरु किया तो वह मुझे में लगी थी वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा।

मैंने अपने मोटे लंड को नीलम की चूत पर लगा दिया और अंदर की तरफ धक्का देना शुरू किया तो नीलम मुझे कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है लेकिन मेरा लंड नीलम की चूत के अंदर जा चुका था। जिस प्रकार से मेरा लंड उसकी योनि के अंदर गया उससे मुझे अच्छा लग रहा था उसके मुंह से सिसकिया निकल रही थी उसकी मादक आवाज सुनकर में और भी ज्यादा उत्तेजित होता जा रहा था और वह भी बड़ी खुश थी। उसके अंदर से उत्तेजना इतनी ज्यादा बढ़ने लगी मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक दबाया और वह अपने दोनों पैरों को खोलने लगी। मैं उसे तीव्रता से धक्के मार रहा था लेकिन उसकी योनि से ज्यादा ही गर्म पानी बाहर निकलने लगा तो उसने मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड लिया मेरा 9 इंच मोटा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था। मैंने पूरी तेजी से उसे धक्के देने शुरू किया और मुझे बड़ा मजा आता। जिस प्रकार से मैंने नीलम की योनि के मजे लिए उससे वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी और मैं भी खुश था। मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था और जैसे ही मैंने अपने वीर्य को नीलम की योनि में गिराया तो वह खुश हो गई थी।

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